देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी ने हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने न सिर्फ RSS और BJP को निशाने पर लिया, बल्कि कांग्रेस पार्टी के भीतर भी मतभेद उजागर कर दिए हैं।
दिग्विजय सिंह की कथित ‘गोडसे’ टिप्पणी के बाद सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है और पार्टी के कई नेता खुलकर या परोक्ष रूप से इससे दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
सवाल यह है कि यह सिर्फ एक बयान है या कांग्रेस के अंदर चल रहे आंतरिक संघर्ष का संकेत?

क्या है पूरा मामला?
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए:
- RSS
- BJP
को लेकर तीखा हमला बोला।
इस पोस्ट में नाथूराम गोडसे का संदर्भ जोड़ने के बाद विवाद और गहरा गया।
BJP ने इसे राष्ट्रविरोधी और अपमानजनक बताया, वहीं कांग्रेस के अंदर भी इस बयान को लेकर असहजता दिखी।
‘गोडसे’ टिप्पणी क्यों बनी विवाद की वजह?
नाथूराम गोडसे का नाम भारतीय राजनीति में:
- महात्मा गांधी की हत्या
- राष्ट्र की संवेदनशील स्मृति
से जुड़ा है।
ऐसे में किसी भी राजनीतिक बयान में इस संदर्भ का उपयोग भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
दिग्विजय सिंह की टिप्पणी को विपक्ष ने कांग्रेस की “विचारधारा की सोच” से जोड़कर हमला तेज़ कर दिया।
कांग्रेस पार्टी के भीतर क्यों बढ़ी बेचैनी?
इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदर दो साफ धड़े नजर आए:
एक धड़ा
- दिग्विजय सिंह के बयान को
- निजी राय बताकर
- पार्टी लाइन से अलग मान रहा है
दूसरा धड़ा
- RSS-BJP पर हमले को
- वैचारिक संघर्ष का हिस्सा
- और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहा है
यही मतभेद कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी को उजागर करता है।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं
कई वरिष्ठ नेताओं ने:
- बयान से दूरी बनाई
- “पार्टी की आधिकारिक राय नहीं” कहा
- विवाद को शांत करने की कोशिश की
कुछ नेताओं का कहना है कि:
“ऐसे बयान चुनावी माहौल में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।”
BJP का तीखा पलटवार
BJP ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और आरोप लगाया कि:
- कांग्रेस की मानसिकता राष्ट्रविरोधी है
- RSS को बदनाम करने की साजिश की जा रही है
BJP नेताओं ने इसे:
- वोट बैंक की राजनीति
- ध्यान भटकाने की कोशिश
बताया।
चुनावी नजरिए से कितना नुकसानदेह?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- ऐसे बयान मध्यम वर्ग और न्यूट्रल वोटर्स को दूर कर सकते हैं
- कांग्रेस को सफाई देने में ऊर्जा लगानी पड़ती है
- असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं
चुनावी साल में यह विवाद कांग्रेस के लिए डैमेज कंट्रोल की चुनौती बन गया है।
दिग्विजय सिंह: बयानबाज़ी और विवादों का पुराना रिश्ता
यह पहला मौका नहीं है जब दिग्विजय सिंह अपने बयान को लेकर विवादों में आए हों।
उनकी पहचान रही है:
- बेबाक बयान
- तीखी आलोचना
- वैचारिक टकराव
समर्थक इसे ईमानदारी मानते हैं, आलोचक इसे पार्टी के लिए बोझ।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर:
- #GodseRemark
- #DigvijayaSingh
- #CongressVsBJP
जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
जहां BJP समर्थकों ने हमला बोला, वहीं कांग्रेस समर्थकों ने बयान का बचाव किया।
FAQs (People Also Ask – SEO Friendly)
Q1. दिग्विजय सिंह का विवादित बयान क्या था?
उन्होंने RSS-BJP को लेकर पोस्ट में गोडसे का संदर्भ दिया।
Q2. क्या यह कांग्रेस की आधिकारिक राय है?
नहीं, पार्टी ने इसे व्यक्तिगत बयान बताया है।
Q3. BJP ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP ने इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता करार दिया।
Q4. क्या इससे कांग्रेस को नुकसान होगा?
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक चुनावी माहौल में नुकसान संभव है।
निष्कर्ष (Conclusion)
‘गोडसे’ टिप्पणी पर उठा विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के अंदर चल रहे वैचारिक और रणनीतिक मतभेदों को भी सामने लाता है।
दिग्विजय सिंह का RSS-BJP पर हमला जहां विपक्ष को आक्रामक होने का मौका देता है, वहीं कांग्रेस को बार-बार सफाई देने की स्थिति में डाल देता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि:
- कांग्रेस इस विवाद से कैसे निपटती है
- और क्या पार्टी भविष्य में ऐसे बयानों पर लगाम लगाती है या नहीं।